एलएनटी फाइनेंस कंपनी ने किया प्राइवेट शिक्षकों का जीना हराम, प्राइवेट शिक्षकों ने कहा आत्महत्या के सिवा कोई उपाय नही।

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मुज़फ़्फ़रपुर : बीते मार्च 2020 से कोरोना महामारी को देखते हुए संपूर्ण देश में चल रहे लॉकडाउन की वजह से प्राइवेट विद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों के शिक्षकों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। विगत 7 महीनों से विद्यालय एवं शैक्षणिक संस्थान बंद है, इन्हीं वजह से शिक्षकों के आय का साधन भी बंद हैं। प्राइवेट शिक्षकों ने इसको लेकर कई बार गुहार भी लगाया परंतु अब तक चल रहे हैं लॉक डाउन की परिस्थितियों को देखते हुए यह प्रतीत होता है कि सरकार की नजर प्राइवेट विद्यालयों के शिक्षकों पर बिल्कुल भी नहीं है। प्राइवेट शिक्षक अपना दर्द बांटते हुए या बताते हैं कि विगत छह सात महीनों से किसी तरह से जमा पूंजी के आधार पर या फिर कर्ज लेकर जीवन यापन करने पर मजबूर हैं। कई छोटे विद्यालयों के शिक्षकों तो परिवार के लिए भोजन का भी प्रबन्ध नही कर पा रहे हैं।

रहने के स्तर में भी काफी हद तक बदलाव आ चुका हैं। ऐसे में जिन घरों में बीमार लोग रह रहे हैं वैसे परिवारों का लालन-पालन में बेहद मुश्किल से हो पा रहा है।

परंतु उसी बीच अलग-अलग फाइनेंस कंपनी के लोगों ने प्राइवेट शिक्षकों पर धावा बोल दिया है। मार्च महीने तक सरकार के द्वारा दिए गए निर्देशानुसार शांति बरतने के बाद अब प्राइवेट फाइनेंस कंपनी के द्वारा हर किसी को ईएमआई के लिए बोला जा रहा है। इसी बीच l&t फाइनेंस कंपनी के द्वारा मुजफ्फरपुर के कई शिक्षकों को जबरन कॉल कर या उनके घरों पर जाकर धमकाते हुए EMI भरने की बात कही जा रही है।
प्राइवेट शिक्षकों का कहना है कि जब उनका पूरा परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है हॉट सबको के पास आय का अभी कोई साधन उपलब्ध नहीं है ऐसे में एलएनटी कंपनी के द्वारा बार-बार दिए जा रहे हैं इस धमकी से वे तंग आ चुके हैं। मानसिक रूप से लगातार की जा रही प्रताड़ना को अब झेलने की शक्ति भी नहीं बची है। ऐसे में एक प्राइवेट शिक्षक आंखों में आंसू भरते हुए बताते हैं कि उनके और उनके परिवार के पास आत्महत्या के अलावा कोई साधन नहीं बचा है। अब सवाल यह है कि फाइनेंस कंपनी के द्वारा लगातार किए जा रहे हैं कॉल एवं जबरन मांगे जा रहे पैसे से प्राइवेट शिक्षक किस प्रकार उभर पाएंगे।
बड़ा इसी संदर्भ में दूसरे किसी एक शिक्षक से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि एलएनटी कंपनी से उन्होंने एक फाइनेंस कराते हुए एक बाइक खरीदी थी और लॉकडाउन के पूर्व तक हर महीने सही समय पर उन्होंने यहईएमआई का भुगतान भी किया परंतु लॉकडाउन के बाद से आय के संपूर्ण साधन बंद होने के बाद वही ईएमआई भरने में असमर्थ हैं। परंतु एलएनटी कंपनी वाले उनको कॉल करके यह बोलते हैं कि आप चाहे भले कहीं से भी कुछ भी कर कर पैसा लाओ पर लोन की किश्त किसी हाल में भरों।

जब शिक्षक नया गुहार लगाते हुए कहा कि ऐसे प्रस्तुति में वह पैसा कहां से लाएंगे और उनके पास आत्महत्या के सिवा कोई चारा नहीं है तो एलएनटी कंपनी की ओर से आए हुए व्यक्ति के द्वारा यह कहा गया कि तो भले आत्महत्या कर लो पर पैसा तो समय पर भरना ही पड़ेगा।

जब इस संपूर्ण घटना की जानकारी बिहार से संवाददाता को हुई तो बिहार दस्तक संवाददाता ने एलएनटी कंपनी के द्वारा किए गए फ़ोन पर बातचीत करते हुए कहा कि हम आपके कार्यालय में आ कर आपके अधिकारियों से बातचीत करना चाहेंगे, ऐसे में कंपनी के अधिकारियों के द्वारा बड़े ही आवेश में संवाददाता को कार्यालय बुलाया गया। परंतु जब संवाददाता कार्यालय पहुंचे उससे पहले ही एलएनटी कंपनी के सभी अधिकारी शटर गिरा और ताला मार कर फरार हो गए।

अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि प्राइवेट विद्यालयों में शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों की समस्या क्या सरकार सुनेगी या फिर इसी तरीके से एलएनटी एवं अन्य कंपनियों के द्वारा दिए जा रहे धमकी एवं जबरन वसूली जा रहे पैसे से प्रताड़ित हो कर शिक्षकों को वाकई आत्महत्या का रास्ता अपनाना होगा।

हालांकि बिहार दस्तक सभी शिक्षकों से निवेदन करता है कि आत्महत्या एक अभिश्राप हैं और आप सभी स्वयं सभी का उचित मार्गदर्शन करते हैं एवं सही रास्ता दिखाने का काम करते हैं। ऐसे में यह आप सभी को हौसला दिखाना होगा और इस बुरे दौर में अमानवीय व्यवहार करने वाले कंपनियों पर निश्चित तौर पर उचित करवाई होनी चाहिए।