निजी शिक्षकों के प्रदर्शन के बाद हरकत में आई प्रशासन, जिलाधिकारी ने कहा शिक्षकों की मांग हेतु सरकार को सौंपा जाएगा ज्ञापन।

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आज शिक्षा बचाओ संघर्ष मोर्चा के बैनर तले” शिक्षा बचाओ अभियान” के अंतर्गत जिले के तमाम शैक्षणिक संस्थानों ( स्कूल कोचिंग ) के शिक्षकों के द्वारा स्थानीय समाहरनालय मे धरना प्रदर्शन, रैली एवं भिक्षाटण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
रैली में जिले के शिक्षकों ने अपने हाथों में भिक्षा पात्र एवं शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं से संबंधित नारों की तख्तियां पर नारे लगाए गए-

(1) जो देता रहा है शिक्षा, वह मांग रहा है भिक्षा

(2) जब शिक्षक समाज को देता ज्ञान, तब सरकार क्यों कर रही परेशान

(3) जब तक शिक्षक भूखा है, ज्ञान का सागर सूखा है ।

(4) शिक्षकों का है यह अभियान सरकार लौटाए उनका सम्मान।

(5) अब शिक्षक हो गया है बेरोजगार, तो कैसा होगा समाज का सपना साकार।

(6) लॉकडाउन का मार, शिक्षक क्यों जिले बारंबार ।

(7) शिक्षक कर रहा सड़क पर संघर्ष, कैसे होगा समाज का उत्कर्ष ।

अपने हाथों में लेकर जिला अधिकारी समेत सभी सरकारी कार्यालयों में भिक्षाटान किया गया।
इस सांकेतिक भिक्षाटन के माध्यम से सरकार, शासन, प्रशासन का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकृष्ट करना है । जिसमें सभी शिक्षकों ने एक स्वर से कहा कि जिले के तमाम शैक्षणिक संस्थान स्कूल कोचिंग तत्काल प्रभाव से खुले ,सभी संस्थानों को करोना काल का आर्थिक पैकेज मुहैया कराया जाए । जिसमें भूखे शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की आर्थिक मदद की जा सके । छात्रों की बहुसंख्यक आबादी निजी स्कूलों एवं कोचिंग संस्थानों पर आश्रित है और यह सभी इस लंबे लॉकडाउन की वजह से गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं । स्कूलों और बसों के ग्राहक नहीं मिल रहे हैं । स्कूल संचालक स्कूल बस बेचने को मजबूर हैं । उनके जीव यापन पर भी गंभीर संकट आ गया है।
अतः इन्हें तत्काल प्रभाव से आर्थिक पैकेज देकर बचाया जाए।
शिक्षकों ने जिलाधिकारी महोदय से यह भी मांग किया कि स्कूलों के बसो का टैक्स , बिजली बिल एवं सभी प्रकार के शुल्क करोनाकाल अब्धी का माफ किया जाय।
मासिक शुल्क भुगतान के मामले में भी सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी । सरकार की सरकार की ढुलमुल नीति की वजह से अभिभावक भ्रम में है, और आवश्यक शुल्क का भुगतान नहीं कर रहे हैं । अधिकांश छात्र ग्रामीण इलाके से आते हैं ,जहां मोबाइल का नेटवर्क भी सही से काम नहीं करता है । ऐसी परिस्थिति में ऑनलाइन पढ़ाई एक मजाक बनकर रह गया है। आज शहर के चारों और चहल पहल है सब कुछ खुल चुका है। ऐसे में कोरोना के नाम पर विद्यालयों को बंद रखने से शिक्षा व्यवस्था खत्म हो जाएगी । शिक्षा विभाग बिहार सरकार द्वारा बिना पढ़ाए छात्रों की अगली कक्षा में प्रोमोट करने का कदम आत्मघाती है।

जहां एक और सरकार विभिन्न प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन कर रही है, वहीं दूसरी और शिक्षकों एवं छात्रों के पढ़ने- बढ़ाने को प्रतिबन्धित करती है ।
आखिर सरकार की मंशा क्या है ? क्या शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त कर देना है ?RTE के अंतर्गत आवंटित विभिन्न विद्यालयों की राशि का भुगतान किया जाए।
डीपीओ शिक्षा विभाग मुजफ्फरपुर द्वारा बिना कारण तकरीबन 300 निजी विद्यालयों की प्रश्वाकीर्ति रद्द कर दिया गया । जिन्हें अभिलंब बहाल किया जाए। नवीकरण किया जाए एवं पूर्व से लंबित सैकड़ों नवीन विद्यालयों की प्रस्तुति दी जाए सभी शिक्षक अपने उपरोक्त मांगों के समर्थन में धरना प्रदर्शन ,रैली एवं भिक्षआटान का आयोजन किया ।

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जिसमें संयोजक विकास शुक्ला, राजेश कुमार सिंह, सुधीर कुमार सिंह ,मुकुट मणि, मनोज कुमार सिन्हा ,रंजन कुमार सिन्हा, ललन कुमार ,राम जानकी सिंह, अनमोल कुमार ,मोहन गुप्ता, नागेंद्र कुमार, बालेंद्र कुमार, वरुण कुमार त्रिपाठी, हरिशंकर सिंह, विकास कुमार ,रंजन कुमार, कुंदन कुमार, धनजय कुमार, रणधीर कुमार ,मुन्ना सिंह, मोहम्मद शमशेर, कामू सर, जितेंद्र कुमार ,प्रशांत कुमार, परशुराम कुमार, इरफान सर बार्शी सर, गुंजन, चंदन कुमार, अखिलेश कुमार, भरत सिंह, महेश कुमार, राकेश कुमार, प्रभात कुमार, मृत्युंजय कुमार श्रीवास्तव ,सुनील कुमार ,आदित्य रंजन ,नीरज कुमार, संतोष कुमार झा सहित शहर के लगभग 200 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों के निदेशक प्राचार्य एवं शिक्षकों ने कार्यक्रम में भाग लिया ।

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भविष्य के रणनीति के अंतर्गत सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया, कि अगर सरकार मोर्चा के मांगों को 10 दिनों के भीतर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो इस अभियान को प्रखंड से लेकर संसद भवन तक चक्काजाम आंदोलन किया जाएगा ।

हालांकि आज धरना प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन काफी सक्रिय हो चुकी है जिलाधिकारी ने कहा है कि आज ही एक ज्ञापन सरकार को सौंपा जाएगा। जिसमें निजी शिक्षकों के द्वारा रखी गई सारी मांगों पर विचार करेगी सरकार।

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