पर्यटन दिवस पर बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों के विषय में जाने।

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हर साल 25 जनवरी को देश में राष्ट्रीय पर्यटन दिवस (National Tourism Day) के रूप में मनाया जाता है। भारत की विविधता और बहुसंस्कृतिवाद के कारण, यह दिन देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव वाले पर्यटन के महत्व को उजागर करने के लिए है।

आज बिहार दस्तक आपको बताएगा बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों के विषय में, जहाँ आप भी घूमने की योजना जरूर बनाए-

1. त्रिमोहिनी संगम

त्रिमोहिनी संगम बिहार राज्य के कटिहार जिला के कटरिया गाँव के निकट स्तिथ तीन नदियों का संगम है। यहाँ प्रमुख रूप से कोशी का गंगा में मिलन होता है, जिसके साथ ही कलबलिया नदी की एक छोटी धारा की उत्पत्ति होती है । त्रिमोहिनी संगम भारत की सबसे बड़ी उत्तरवाहिनी गंगा का संगम है। 12 फरवरी वर्ष 1948 में महात्मा गांधी के अस्थि कलश जिन 13 तटों पर विसर्जित किए गए थे, त्रिमोहिनी संगम भी उनमें से एक है |

2. माँ सीता का जन्मस्थल

भगवान राम की पत्नी सीता की जन्मस्थली होने के नाते सीतामढ़ी शहर बिहार का एक महत्वपूर्ण गंतव्य है। बिहार का यह शहर तीर्थ स्थल होने के साथ-साथ एक ऐतिहासिक स्थल भी है। इन्हीं वजहों से यह जगह बिहार में घूमने के लिए एक दिलचस्प जगह हो सकती है।

इस शहर में एक 100 साल पुराना मंदिर है, जिसे जानकी मंदिर कहा जाता है। माना जाता है कि, यह ऐसी जगह है जहाँ सीता का जन्म हुआ था। इसके साथ ही, यहां मौर्य काल का बना हुआ एक रॉक-कट अभयारण्य भी है जो कि यहां का मुख्य आकर्षण है। सीतामढ़ी हिंदू भक्तों और इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए एक उत्तम स्थान है। ऐतिहासिक शौकीन रखने वाले लोग इस जगह का अधिक आनंद ले सकेंगे।

3. दरभंगा

बिहार की सांस्कृतिक राजधानी माने जाने वाले दरभंगा शहर सदियों से संगीत कला और लोक कला के क्षेत्र में उत्कृष्टता रखे हुए है। बिहार का यह जिला लोक कला शैली की समृद्ध परंपरा और मिथिला पेंटिंग के लिए देशभर में मशहूर है। बिहार का यह शहर प्राचीनकाल में, मिथिला का प्राचीन शहर हुआ करता था।

‘दरभंगा’ का नाम दो शब्दों “द्वार-बंगा” से बना है, “द्वार” का मतलब है दरवाजा और “बंगा” का मतलब है बंगाल। यह “बंगाल के प्रवेश द्वार” का प्रतीक है। दरभंगा किला, श्यामा काली मंदिर, मखदूम बाबा की मजार, होली रोसरी चर्च, चंद्रधारी संग्रहालय और हराही तालाब, दरभंगा पर्यटन के मुख्य आकर्षण हैं।

4. विश्व शान्ति स्तूप

बिहार के राजगीर में स्थित विश्व शान्ति स्तूप कई मायनों में पर्यटकों के लिए ख़ास है। विश्व शांति पैगोडा के नाम से मशहूर विश्व शांति स्तूप ऐतिहासिक शहर राजगीर में बना हुआ है, यह स्थल बिहार पर्यटन के लिए गर्व है। यह भारत में निर्मित 7 शांति पैगोडाओं में से एक है और निश्चित रूप से बिहार में घूमे जाने जगहों में से एक है।

400 मीटर की ऊंचाई पर, रणगीर पहाड़ी के उच्चतम बिंदु पर स्थित यह शान्ति स्तूप मस्ती, इतिहास को जानने, फोटो खिंचवाने और शांति के लिए बेस्ट जगह है। इस स्तूप पर जाने के लिए वैसे तो अन्य रास्ते भी हैं लेकिन सबसे ख़ास है रोप वे। अगर कभी बिहार जाएँ तो इस जगह की यात्रा अवश्य करें।

5. नवलखा महल, राजनगर

खंडहरों में स्थित, नवलखा पैलेस बिहार के मधुबनी के पास राजनगर में स्थित है। इस महल का निर्माण महाराजा रामेश्वर सिंह ने करवाया था और कहा जाता है कि 1934 में भूकंप के दौरान व्यापक विनाश हुआ था। विनाश के बाद इसका कोई जीर्णोद्धार नहीं हुआ था, इस प्रकार यह महल अब खंडहर बना हुआ है। यह एक शाही महल है और भले ही यह इतना क्षतिग्रस्त हो गया है, फिर भी कोई भी इसकी स्थापत्य प्रतिभा पर आश्चर्य कर सकता है। इस महल परिसर में उद्यान, तालाब और मंदिर शामिल थे। जो कि आज भी पर्यटकों के देखने योग्य मुख्य आकर्षण हैं।

6. वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान

पश्चिम चंपारण जिले में स्थित, वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान भारत-नेपाल सीमा पर गंडक नदी के तट पर स्थित है। विशाल क्षेत्र में फैला यह पार्क दो वर्गों में विभाजित है। साल 1990 में बना यह राष्ट्रीय उद्यान लगभग 335 वर्ग किमी के क्षेत्र में फैला हुआ है। बिहार राज्य का एकमात्र वन्यजीव अभ्यारण्य, वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान, हिमालय तराई परिदृश्य के घने हरे भरे जंगलों से आच्छादित है। इस क्षेत्र का मुख्य आकर्षण बंगाल बाघ (2013 के रूप में 22 क्षेत्र) हैं।

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सरकार ने देश में 800 हेक्टेयर वन क्षेत्र को घास के मैदान में परिवर्तित करने की योजना बनाई है ताकि यह देश का सबसे बड़ा चारागाह बन सके। वाल्मीकि राष्ट्रीय उद्यान का नाम वाल्मीकि नगर से जुड़ा हुआ है, जो कि जंगलों से सटा हुआ शहर है और वन्यजीव अभ्यारण्य का एकमात्र संभव प्रवेश द्वार भी है।

7. विक्रमशिला विश्वविद्यालय का खंडहर

बिहार के भागलपुर शहर से करीब 50 किलोमीटर पूरब में कहल गांव के पास स्थित है विक्रमशिला विश्वविद्यालय का यह खंडहर। भागलपुर के अंतीचक गांव स्थित विक्रमशिला का खंडहर अपनी ऐतिहासिक महत्वों की वजह से राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित करती है।

विक्रमशिला विश्वविद्यालय का खंडहर
आठवीं सदी के अंतिम वर्षों या नौवीं सदी की शुरुआत में पाल वंश के राजा धर्मपाल ने इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। तक़रीबन चार सदियों तक वजूद में रहने के बाद तेरहवीं सदी की शुरुआत में जाकर यह विश्वविद्यालय नष्ट हो गया था। और, आज यह केवल खंडहर रह गया है। इसकी अतीत कुछ ऐसा है कि आज भी काफी संख्या में पर्यटक इसे देखने बिहार आते हैं।

8. महावीर मंदिर


राजधानी पटना में स्थित महावीर मंदिर बिहार का प्रसिद्ध गंतव्यों में से एक है। हनुमानजी को समर्पित यह मंदिर, हिंदुओ के प्रमुख मंदिरों में से एक है। यहाँ प्रतिदिन भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। और तो और, रामनवमी के पावन अवसर पर तो यहाँ भक्तों की भयंकर कतार लग जाती है।

पटना स्टेशन के नज़दीक स्थित यह मंदिर भक्तों के पहुंचने के लिहाज़ से काफी आसान है। अगर, आप कभी भी पटना आते हैं तो इस मंदिर का दर्शन अवश्य करें।

9. तख्त श्री पटना साहिब गुरुद्वारा

पटना रेलवे स्टेशन से 13 किमी की दूरी पर स्थित यह गुरुद्वारा सिखों की आस्था से जुड़ा एक ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल है। 18वीं शताब्दी में बना यह गुरुद्वारा सिखों के पांच पवित्र तख्तों में से एक माना जाता है। इस गुरुद्वारे में प्रकाशोत्सव के समय पर पर्यटकों की काफी भीड़ लग जाती है।

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अगर आप बिहार भ्रमण पर जाएँ तो इस पवित्र और सुकून भरा जगह पर अवश्य जाएँ। यहां ना केवल देखने के लिए बहुत कुछ है बल्कि यहां आपको मन की शान्ति भी मिलेगी। जिसे आज के दौर में हर कोई ढूंढ रहा है।

10. गोलघर

इस जगह के नाम की तरह ही इसकी संरचना भी है। यानि, एकदम गोल। यह आज कल में नहीं बना है, इसका निर्माण ब्रिटिश गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स द्वारा साल 1784 – 1786 में कराया गया था। अब आप यह सोच रहे होंगे कि ब्रिटिश गवर्नर जनरल को अगर घर ही बनाना था तो अच्छा ख़ासा महल की जगह ये गोलघर क्यूं बनवाया।

दरअसल, उन्होंने अनाज की भंडारण के लिए इस गोलघर का निर्माण करवाया था। आपको जानकार आश्चर्य होगा कि, इस विशाल गोलघर में 1,40, 000 टन का अनाज का भण्डारण किया जा सकता है। हालांकि, अब इसमें अनाज का भंडारण नहीं होता। यह जगह अब पर्यटकों के लिए एक प्रसिद्ध गंतव्यों में से एक है। पटना स्टेशन से 5 किमी दूर स्थित इस जगह के छत से पटना शहर का एक बड़ा हिस्सा देखा जा सकता है।

11.पाटन देवी


बिहार की राजधानी पटना में स्थित यह मंदिर भी अपनी धार्मिक महत्वों के कारण काफी मशहूर है। पटना में स्थित यह मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ पर देवी सती की दाहिनी जांघ गिरी थी। इन्हीं वजहों से इस मंदिर को शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। नवरात्रि के समय मे यहाँ लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं।

12. बराबर गुफाएं

बिहार के जहानाबाद रेलवे स्टेशन से 33 किमी और गया रेलवे स्टेशन से 31 किमी की दूरी पर स्थित बराबर गुफाएं अपने आप में ख़ास है। और, इसकी खासियत की वजह से पर्यटकों के लिए भी यह जगह आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। चट्टानों को काटकर बनाई गई भारतीय गुफाओं में से सबसे प्राचीन गुफा है।

चट्टानों को काटकर बनाई गई बराबर गुफा भारतीय गुफाओं में सबसे प्राचीन गुफा है। इन गुफाओं का उपयोग जैन सम्प्रदाय, बौद्ध सम्प्रदाय और आजीविका सम्प्रदाय के सन्यासियों द्वारा होता था। दरअसल, वर्षा ऋतु के दौरान ये सन्यासी बारिश से अपनी रक्षा करने के लिए इन्ही गुफाओं में शरण लेते थे। आज यह जगह पर्यटकों के लिए बेस्ट गंतव्य बन गया है।

13. ककोलत वाटरफॉल

क्या आपको पता है, बिहार के नवादा में स्थित इस जगह को बिहार के कश्मीर के नाम से जाना जाता है। जी हाँ, आपको यह पढ़कर थोड़ा आश्चर्य जरुर हो रहा होगा लेकिन यह सच है। ककोलत जलप्रपात को बिहार राज्य के कश्मीर नाम से भी पुकारा किया जाता है। इस नाम के पीछे की मुख्य वजह इस जगह की अतिशोभनीय प्राकृतिक सुंदरता है।

लगभग 160 फ़ीट ऊंचाई वाले इस झरने को देखने के लिए गर्मी के मौसम में पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। देश ही नहीं बल्कि अच्छे खासे संख्या में विदेशी पर्यटक भी यहाँ पिकनिक मनाने आते हैं।

14. शेर शाह सूरी का मकबरा

बिहार के सासाराम जिले में स्थित शेर शाह सूरी का मकबरा अफगानी स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। शेर शाह सूरी का यह मकबरा केवल अपने ऐतिहासिक महत्व ही नहीं बल्कि बेजोड़ खूबसूरती के लिए भी देश भर में प्रसिद्ध है। इतना ही नहीं, साल 1998 में इस मकबरे को संयुक्त राष्ट्र ने विश्व धरोधर मे शामिल करने का फैसला लिया। यहां आने वाले पर्यटकों को इस मकबरे की अद्भुत एवं बारीकी से की गई कलाकारी खूब लुभाती है।

15. द ग्रेट बुद्धा स्टेचू

बिहार राज्य में पर्यटकों के घूमने और देखने के लिए बहुत कुछ है। बिहार के बोधगया शहर में स्थित भगवान बुद्ध की यह 25 मीटर ऊंची प्रतिमा मा बौद्ध धर्म के लोगो का प्रमुख धार्मिक स्थल है। इसके अलावा, हर धर्म के लोग यहां आकर प्रसन्नचित होते हैं। 25 मीटर ऊंची बनी इस प्रतिमा में भगवान बुद्ध ध्यान की मुद्रा में बैठे हुए हैं। बुद्ध का यह रूप यहां आने वाले पर्यटकों के लिए शांति प्रदान करने वाला है। पर्यटक यहाँ आकर इन प्रतिमा के सामने फोटो खिंचवाकर इसे अपने जीवन के सुनहरे यादों में शुमार करते हैं।

16. रोहतास किला

बिहार के रोहतास जिले में स्थित रोहतास किला, भारत के सबसे प्राचीन किलों में से एक है। 17वीं शताब्दी में बने इस किले को देखने कई पर्यटक यहाँ आते हैं। और, खासकर यदि आप इतिहास प्रेमी हैं फिर क्या ही कहना। बिहार में स्थित इस जगह पर इतिहास प्रेमी के अलावा अन्य लोगों के देखने और सीखने के लिए काफी कुछ है।

17. जल मंदिर

बिहार के पावापुरी में स्थित, एक तालाब के बीचोबीच बना यह जल मंदिर पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र है। बिहार के पटना रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी 94 और गया रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी 80 किमी है। यहां भगवान महावीर की चरण पादुका रखी हुई है।

स्थानीय किवदंतियों के अनुसार, भगवान महावीर का अंतिम संस्कार इसी तालाब के पास हुआ था। चूंकि, यह मंदिर पानी के बीचोबीच बना हुआ है, इसलिए आपको इस मंदिर तक पहुँचने के लिए 600 फ़ीट लम्बा एक पल बना हुआ है। जहाँ एक तरफ, यह मंदिर धार्मिक आस्था के लिए महत्वपूर्ण है वहीं दूसरी तरफ इसकी सुंदरता अत्यंत लुभाने वाली है।

18. बिहार म्यूजियम

बिहार म्यूजियम राजधानी पटना में बनाया गया एक नवनिर्मित म्यूजियम है, जिसे आम जनता के लिए साल 2015 में खोला गया था। ध्यान रहे कि, पटना म्यूजियम और बिहार म्यूजियम दोनों अलग है। पटना म्यूजियम की तुलना में बिहार म्यूजियम में 100 से अधिक कलाकृतियां संग्रहित की गई हैं। पटना स्टेशन से बस 5 किलोमीटर दूर है यह म्यूजियम, यहां जाने के लिए रेलवे स्टेशन से आपको आसानी से टैक्सी मिल जायेगी।

सोमवार को यह म्यूजियम बन्द रहता है। इसमें प्रवेश का चार्ज भारतीय पर्यटकों के लिए 20 रु/व्यक्ति, छात्रों के समूह के लिए 2 रु/व्यक्ति जबकि, विदेशी पर्यटकों के लिए 250 रु/व्यक्ति रखा गया है।

19. केसरीआ स्तूप


बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले में स्थित यह स्तूप भारत का सबसे लंबा और सबसे बड़ा बुद्ध स्तूप माना जाता है, केसरिया स्तूप बिहार पर्यटन के प्रमुख आकर्षणों में से एक है। माना जाता है कि, इस स्तूप का निर्माण राजा चक्रवर्ती के शासन में 200 से 750 ईस्वी के बीच हुआ था। 104 फीट की ऊँचाई के साथ, यह एक भव्य संरचना है जिसे बिहार की यात्रा के दौरान अवश्य घूमना चाहिए।

20. नालंदा

बिहार का नालंदा जिला ‘नालंदा विश्‍वविद्यालय’ की वजह से भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर है। 450 ईसवीं में गुप्त शासक कुमारगुप्‍त ने इस विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना की थी। नालंदा विश्‍वविद्यालय दुनिया भर में प्राचीन काल में सबसे बड़ा अध्ययन का केंद्र था और यहाँ दुनिया भर के छात्र पढ़ाई करने आते थे।

बौद्ध दर्शन, धर्म और साहित्य का दस वर्षों तक अध्ययन करने वाले चीनी यात्री हेनसांग के मुताबिक़, इस विश्वविद्यालय में प्रवेश पाना सरल नहीं था। केवल उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्र ही यहां प्रवेश पा सकते थे। हालांकि, 12वीं शताब्दी में बख़्तियार ख़िलजी ने आक्रमण करके इस विश्वविद्यालय को नष्ट कर दिया। और तब से यह विश्‍वविद्यालय पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। चौकाने वाली बात यह है कि, इस विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में इतनी किताबें थी कि नष्ट करने के छह महीनों तक धू-धू कर जलता रहा था।

21. वैशाली

बिहार का वैशाली जिला भगवान बुद्ध का जन्मस्थली होने के साथ-साथ विश्व का सबसे पहला गणतंत्र कहा जाता है। यानि, बिहार के वैशाली में ही विश्व का सबसे पहला रिपब्लिक लागू हुआ था। बिहार का यह जिला भगवान महावीर की जन्म स्थली होने के कारण जैन धर्म के लोगों के लिए पवित्र नगरी माना जाता है। इन सब के अलावा, इस जिला में अशोक स्‍तम्भ, बौद्ध स्‍तूप और विश्व शांति स्तूप (जापान के निप्पोणजी समुदाय द्वारा बनवाया गया) भी पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

22. मुंगेर

बिहार का मुंगेर जिला अपने ऐतिहासिक स्थलों के लिए लोकप्रिय है। यहाँ स्थित ऐतिहासिक किला को देखने काफी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं। इसके अलावा यहां पर सीताकुंड नामक प्रमुख कुंड मौजूद है। मुंगेर शहर से तक़रीबन 6 किलोमीटर दूर स्थित सीता कुंड मुंगेर आनेवाले पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है।

The Jamun Tree

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस कुंड का नाम मर्यादा पुरूषोत्तम राम की धर्मपत्नी सीता के नाम पर रखा गया है। धार्मिक कहानियों के अनुसार, जब भगवान राम सीता को लंका से छुड़ाकर लाए थे तो उनको अपनी पवित्रता साबित करने के लिए अग्नि परीक्षा देनी पड़ी थी और धर्मशास्‍त्रों के अनुसार, अग्नि परीक्षा के बाद माता सीता ने जिस कुंड में स्‍नान किया था यह वही कुंड है।