फिल्म कलाकार अक्षत उत्कर्ष के मौत के मामले में मानवाधिकार अधिवक्ता एस. के. झा की याचिका पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान, दिया जांच का आदेश

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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मुंबई पुलिस कमिश्नर को दिया आदेश-

मुजफ्फरपुर : जिले के निवासी और बॉलीवुड में संघर्ष कर रहे कलाकार अक्षत उत्कर्ष की मुम्बई स्थित फ्लैट में हुई संदिग्ध मौत की निष्पक्ष जांच के लिए मुजफ्फरपुर के मानवाधिकार अधिवक्ता एस. के. झा ने चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया सहित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने मुम्बई पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाया था। विदित हो कि मुजफ्फरपुर जिले के सिकंदरपुर निवासी अक्षत उत्कर्ष की लाश मुम्बई के अँधेरी वेस्ट के आर.टी.ओ. लेन स्थित गोकुल बिल्डिंग के फ्लैट नंबर 116 में दिनांक 27.09.2020 की रात फंदे से लटकते हुई मिली थी। हैरान करने वाली बात यह है कि अक्षत के रूम पार्टनर स्नेहा चौहान उसी फ्लैट के पास वाले कमरे में थी। घटना के तिथि के दिन ही सुबह में मोबाइल पर आकांक्षा दुबे का अक्षत से झगड़ा हुआ था। इस पुरे प्रकरण में अक्षत के रूम पार्टनर नोएडा निवासी स्नेहा चौहान, लखनऊ निवासी अक्षत की दोस्त आकांक्षा दुबे और एक्टिंग के ट्रेनर अभिनव दुबे की भूमिका काफी संदिग्ध है। अक्षत जब मैनेजमेंट की पढाई कर रहा था, तब से आकांक्षा दुबे से उसकी दोस्ती थी। मुम्बई पुलिस इस घटना को दबाने का प्रयास कर रही हैं। मामले के सम्बन्ध में अधिवक्ता एस. के. झा. द्वारा लगातार निष्पक्ष व उच्च स्तरीय जांच की माँग की जा रही थी। इसी के आलोक में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग नई दिल्ली ने अधिवक्ता एस. के. झा की याचिका पर संज्ञान लेकर मुम्बई पुलिस कमिश्नर को जाँच का आदेश जारी किया है। अधिवक्ता ने बताया कि फ़िल्मी दुनिया से जुड़े कलाकारों का लगातार रहस्यमयी तरीके से मौत होना काफी चिंताजनक है। विदित हो कि सुशांत सिंह राजपूत के मामले में मुंबई पुलिस की भूमिका को पूरे देश ने देखा है। अतः मुम्बई पुलिस पर विश्वास करना कही से उचित नहीं है। मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब मुम्बई पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई की जा रही है, यह देखना अतिमहत्वपूर्ण होगा।

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