बिहार बोर्ड ने प्रवेश परीक्षा के नाम पर अभियर्थियों से लिए चार करोड़, एक वर्ष बाद भी नहीं लौटाए

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मुज़फ़्फ़रपुर : बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने डीएलएड सत्र-2020-22 में नामांकन के लिए जिले के चार प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालयों में प्रवेश परीक्षा के नाम पर 50 हजार अभ्यर्थियों से लिए गए चार करोड़ से अधिक रुपये अब तक नहीं लौटाए हैैं। पिछले सत्र में बोर्ड की ओर से अधिसूचना जारी की गई थी कि प्रवेश परीक्षा का आयोजन होगा। इसके लिए सामान्य कोटि के अभ्यर्थियों को 960 और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व दिव्यांग कोटि के लिए 760 रुपये फीस निर्धारित की गई थी। इस हिसाब से जिले के 50 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने बोर्ड को प्रवेश परीक्षा के शुल्क के नाम पर चार करोड़ से अधिक रुपये दिए। कोरोना संक्रमण बढऩे से बोर्ड ने प्रवेश परीक्षा नहीं ली। अंकों के आधार पर मेधा सूची जारी की गई।

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बिहार राज्य प्रशिक्षु शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ऋषिकेश राज ने बोर्ड को पत्र लिखकर कई बार सवाल भी किया कि जब प्रवेश परीक्षा नहीं हुई तो फी क्यों नहीं वापस की गई? ऋषिकेश ने बताया कि पत्र भेजने पर बोर्ड की ओर से कहा जाता रहा कि शीघ्र राशि अभ्यर्थियों के खाते में भेज दी जाएगी, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी किसी भी अभ्यर्थी को राशि नहीं लौटाई गई है।

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बता दें कि इन सरकारी कॉलेजों में डीएलएड में नामांकन के लिए साइंस, आर्ट व वाणिज्य संकाय को मिलाकर कुल 800 सीटें ही हैं। दरअसल, सरकारी कॉलेज की फी कम होने से सीट से करीब 60 गुना अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। अभ्यर्थियों ने कई बार राशि वापस करने की मांग की थी। इसपर बोर्ड की ओर से राशि लौटाने की बात कही गई, लेकिन एक वर्ष बीतने के बाद से इसे वापस नहीं किया गया है। वहीं, शिक्षा विभाग भी इस संबंध में कुछ भी स्पष्ट नहीं बता रहा है।

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