बिहार में रोजगार के मामले में प्लुरल्स-जदयू आमने-सामने, जदयू नेता की टिप्पणी के बाद प्लुरल्स का पलटवार।

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●जदयू के पलटवार पर अब प्लुरल्स का तीखा जबाब, कहा सरकार की नाकामी छिपाने के लिए किसी हद तक गिर सकते हैं अजय आलोक।

पटना : पुष्पम प्रिया चौधरी ने RTI के हवाले से मिली जानकारी को अपने ट्विटर हैंडल से साझा करते हुए बताया कि पिछले कुछ दिनों में बिहार के सरकारी विभागों में कई पद खाली पड़े हैं। मत्स्य विभाग, राजस्व विभाग, वित्त विभाग समेत कई स्थानों पर हजारों पद वर्षों से खाली पड़े हैं। पुष्पम प्रिया ने सूचना के अधिकार कानून के जरिए हासिल की गई जानकारियां साझा करते हुए नीतीश सरकार पर हमला करते हुए अपने एक ट्वीट में वह लिखती हैं, ”वैकेंसी निकालेंगे नहीं तो रोजगार कहां से देंगे’?

वास्तव में सूचना के अधिकार कानून के हवाले से मिली है जानकारी सरकार की नीतियों पर प्रश्नचिन्ह लगाता है! परंतु इन तमाम आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद जदयू नेता डॉ. अजय आलोक ने पुष्पम प्रिया चौधरी और उनकी पार्टी पर ही सवाल खड़े कर दिए। एवं राजनीतिक टिप्पणी करते हुए कहा कि “बिहार सरकार की नौकरियों के लिए किसी वैकेंसी के लिए पुष्पम प्रिया यदि खुद को उपयुक्त पाएं तो अपने नाम से एक आवेदन दे दें। उन्हें नौकरी मिली तो घाटे की थोड़ी बहुत तो भरपाई हो ही जाएगी।”

इसके पूर्व डॉ अजय आलोक ने सरकार के बचाव में अपनी टिप्पणी में कहा कि “बिहार में पॉलिटिकल मशरूम की खेती खत्म हो गई है, जो थोड़ी बहुत सड़ी-गली बची है वह भी खत्म हो जाएगी। जहां तक बिहार में वैकेंसी की बात है तो सभी विभागों में तेजी से वैकेंसी निकाली जा रही है और जल्द ही देखियेगा की सभी विभागों के अधिकतर पद भर दिए जाएंगे।

वास्तव में अगर आंकड़ों को देखें तो बिहार सरकार वर्ष 2005 के बाद से रोजगार देने के मामले में काफी पीछे रही है। RTI के अनुसार अनुसार मत्स्य विभाग – 1448 में से 1057, बिहार राज्य वित्तीय निगम – 578 में से 532, राजस्व एवं भूमि सुधार – 10344 में से 8461, क्रेडिट एंड इंवेस्टमेंट कॉर्पोरेशन – 100 में से 91 पद खाली हैं। वहीं बिहार में रोजगार एक गंभीर मुद्दा हैं। अब बिहार सरकार की विफलता पर सवाल किए जाने के बाद जदयू नेता डॉ अजय आलोक के द्वारा दिया गया बयान भी संतोषजनक नहीं हैं।

वही पुष्पम प्रिया चौधरी की पार्टी प्लुरल्स की ओर से भी राजनीतिक टिप्पणियों के द्वारा नोकझोंक शुरू हो गया हैं। जदयू नेता के टिप्पणी के बाद प्लुरल्स पार्टी की ओर से प्रदेश प्रवक्ता मीरा कौमुदी ने बयान जारी करते हुए कहा कि अजय आलोक जी के द्वारा दिया गया बयान अमर्यादित एवं दुर्भाग्यपूर्ण है| एक शिक्षित और सम्मानित महिला के लिए उन्होंने ऐसा बोल कर अपनी गरिमा को खुद तार तार किया है| इस बयान से यह दिखता है कि उनकी राजनीति कितनी ओछी है|

जहां तक हमारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नौकरी देने का सवाल है तो उन्हें यह नौकरी अपने लिए सुरक्षित रख लेनी चाहिए क्योंकि बैसाखी के सहारे उनकी राजनीति की दुकानदारी ज्यादा दिन नहीं चलेगी| द प्लूरल्स पार्टी हमेशा से युवाओं के रोजगार के लिए लड़ती रही है और आगे भी लड़ती रहेगी| पार्टी के कार्यकर्ता आखिरी सांस तक युवाओं के रोजगार के लिए लड़ेंगे।

वही मुजफ्फरपुर विधानसभा क्षेत्र से उम्मीदवार रही डॉ पल्लवी सिन्हा ने भी जदयू नेता डॉ अजय आलोक पर तंज कसते हुए कहा कि डॉ. अजय आलोक हैं भ्रष्ट सिस्टम के उपज हैं। वर्ष 2019 में अपनी नकामी की वजह से वे अपनी पार्टी पद से इस्तीफा दे चुके हैं। अब शायद सरकार की नाकामियों को छिपाने कि उनकी ट्रेनिंग चल रही हैं। शायद ट्रेनिंग के बाद उन्हें भी पार्टी में कोई ठोस पद मिल जाए।

डॉ पल्लवी सिन्हा ने आगे कहा कि डॉ अजय आलोक और उनकी पार्टी जदयू को चाहिए कि विचार विमर्श करते हुए बिहार के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य को लेकर सही नीति बनाएं। बिहार के युवाओं को सशक्त करने हेतु बिहार सरकार को पहल करनी चाहिए परंतु यह बिहार का दुर्भाग्य है कि सकारात्मक दिशा पर चर्चा करने के जगह सत्ता दल के राजनीतिक लोग अमर्यादित टिप्पणी करने एवं हर बात पर राजनीति करने पर ज्यादा जोर देते हैं।

प्लुरल्स प्रवक्ता कन्हैया कुमार का बयान। 

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