भागलपुर में रिकॉर्ड 77 दिन बाद 60 वषीर्य महिला डॉक्टर ने कोरोना को मात देकर जीत लीं जंग

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बिहार के भागलपुर के जेएलएनएमसीएच में 77 दिन तक लगातार इलाज कराने के बाद 60 वर्षीय महिला डॉक्टर ने कोरोना से जिंदगी की जंग जीत ली। उन्हें शुक्रवार को डिस्चार्ज कर दिया गया। इतने लंबे समय तक कोरोना संक्रमित रहने का रिकार्ड इसी महिला डॉक्टर ने बनाया। इससे पहले महियामा निवासी 41 वर्षीय युवक जो कि मुंबई से ही कोरोना संक्रमित होकर आया था, उसने 42 दिन बाद कोरोना को मात दी थी।

कोविड समर्पित अस्पताल जेएलएनएमसीएच के नोडल प्रभारी डॉ. हेमशंकर शर्मा ने बताया कि आईसीयू में भर्ती होने वाले करीब  80 प्रतिशत कोरोना संक्रमितों में शुगर व फाइब्रोसिस की समस्या है। ऐसे में वे मरीज जिन्हें शुगर, अस्थमा या सीओपीडी है, वे अपनी सेहत की जांच कराते रहें। क्योंकि इस तरह के बीमारों को कोरोना होने पर उन्हें कोरोना ज्यादा सता रहा है और उन्हें ठीक होने में लंबा समय लग रहा है। ऐसे में इस तरह के मरीज घर से बाहर निकलें तो दो गज की दूरी व मास्क है जरूरी फंडे पर कड़ाई से अमल करें।

कोविड निमोनिया व शुगर ने महिला डॉक्टर की सेहत को किया नासाज
बांका निवासी 60 वर्षीय महिला चिकित्सक कोरोना संक्रमित होने के बाद पांच सितंबर को मायागंज अस्पताल में डॉ. हेमशंकर शर्मा की यूनिट में भर्ती हुई थी। इनकी हालत खराब होने पर 20 दिन तक आईसीयू में इलाज चला था तो 57 दिनों तक मेडिसिन विभाग के आरआर वार्ड में। इस दौरान महिला चिकित्सक को कोरोना संक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्लाज्मा अफरेसिस यानी कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्ति का प्लाज्मा भी चढ़ाया गया। लेकिन यह प्रक्रिया भी महिला चिकित्सक को कोरोना संक्रमण से नहीं उबार सकी।

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बकौल डॉ. हेमशंकर शर्मा, महिला चिकित्सक को हाई शुगर के साथ-साथ कोरोना ने इन्हें फाइब्रोसिस (फेफड़े का सिकुड़ना), कोविड निमोनिया जैसी बीमारी भी दे दी थी। जिसकी वजह से उन्हें सांस लेने में दिक्कत व श्वसन नली में संक्रमण की परेशानी बढ़ गयी थी। इन सब परेशानियों को दूर किया गया। हालांकि इलाज की प्रक्रिया थोड़ी लंबी चली, लेकिन अंततोगत्वा वे ठीक हो गयीं।

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