संत गाडगे जी महाराज के 64वीं पुणयतिथि समारोह मनाई गयी।

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मुजफ्फरपुर : आज संत गाडगे सेवा परिषद, मुजफ्फरपुर इकाई द्वारा संत गाडगे जी महाराज के 64वीं पुणयतिथि समारोह संत गाडगे भवन सिंकदरपुर धोबी घाट पर पूर्व मुखिया परिषद के अध्यक्ष श्री मनोज कुमार बैठा की अध्यक्षता में मनाई गई।
समारोह के उदघाटन करते हुए नगर विधायक श्री विजेंद्र चौधरी सर्वप्रथम उनके आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण किया उन्होंने कहा कि हमारा देश भारत ऋषि मुनियों संतो का देश रहा है , जिन्होंने दर्शन का ज्ञान देकर समाज में संतुलन की व्यवस्था को रखा गया है वैसे भी कहावत है कि सभी भारतीय जन्म से ही दार्शनिक होते हैं ।यही कारण है कि हमारा देश सदियों से गुरु रहा है लोगो सेऊंके बताए हुए मार्ग पर चलने का आग्रह किया ।
मुख्यातिथि श्री देवन रजक प्रदेश अध्यक्ष संत गाडगे सेवा परिषद ने कहा कि हमारे देश में संत कबीर ,गुरु नानक, रविदास जैसे ही संत गाडगे बाबा की अमृतवाणी एवम् उनके लिए कार्य प्रेरणा के श्रोत है। गाडगे बाबा का जन्म भारत की उन्नीसवीं सदी धार्मिक शिक्षा, स्वक्षता की क्रांति कि करी है। जिन्होंने शिक्षा तथा स्वच्छता पर पूरे भारत वर्ष के भ्रमण करते हुए अलख जगाने का काम किए। वैसे संत बाबा को सहृदय श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं तथा उनके बताए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लेता हूं।
मनोज कुमार बैठा पूर्व मुखिया ने कहा कि संत गाडगे बाबा जी का जन्म 23 फरवरी 1876 को महाराष्ट्र प्रदेश के अमरावती जिलांतर्गत शेंगाव में हुआ था । उनके पिता का नाम झिंगराम जी तथा माता का नाम सखु बाई था। उनका बचपन का नाम देबू जी था देबू का बचपन ही ईश्वर भक्ति की ओर झुकाव था नारायण हरि , जय गोपाल गा कर बड़ी भक्ति भाव से भाजन करते थे ये उनका दैनिक कार्यक्रम था ।
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सुजीत रजक ने कहा कि बाबा का निम्न उपदेश था
1,दहेज प्रथा गाडगे बाबा दहेज प्रथा के कट्टर विरोधी थे।जीवन में विवाह एक पवित्र संस्कार है।इस मंगल कार्य को दहेज ने अमंगल बना दिया है ।ये ग्राम देवता को खुश करने के लिए मांस मदिरा जैसे भोग का करा विरोध करते थे। उच नीच छुआछूत जैसी समाज कि कुरीतियों के विरोधी थे संत गाडगे बाबा शिक्षा पर जोर देते हुए कहा करते थे कि अपने बच्चों को शिक्षित बनाने में किसी तरह कि कसर मत करो चाहे अपना पेट ही क्यों न काटना पड़े
अमित कुमार लाला ने कहा कि महाराष्ट्र और उसके बाहर अनेक प्रशिद्ध व्यक्ति गाडगे बाबा के कार्यों के प्रति उदारता और श्रद्धा से नतमस्तक होते थे। महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू,मदन मोहन मालवीय,ड्रा भीम राव अम्बेडकर, कर्म वीर भाऊराव पाटिल, ड्रा पंजाब राव देशमुख जैसे लोगो को बाबा के प्रति बहुतश्रद्धा थी उनसे मिलने राजनीतिज्ञ, साहित्यकार, समाज सेवक,तथा देशभक्त आया करते थे।गाडगे बाबा कि मृत्यु 20 दिसंबर 1956 में हुई आकाशवाणी से उनकी निधन कि घोषणा से पूरे देश में शोक कि दौर दौर गई उनके मृत शरीर को वदनेर के राठौर गार्डन अंतिम दर्शनार्थ रखा गया था। मंच का संचल राज नाथ चंद्रवंशी जी ने किया।

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कार्यकर्म में राम बाबू पटेल, अजय कुमार रजक ,सच्चिदानंद, अशोक कुमार, विनोद रजक, राम सूरत भारती, बब्लू रजक, रिंकू रजक, ललिता देवी, मनोज रजक दीपक रजक,नरेश रजक अनिल बैठा,अरविंद रजक, विकाश कुमार, शशि रजक, मेघू रजक, संजय रजक, दीपक रजक, जय प्रकाश राय, आदि ने विचार रखे ।
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