स्वास्थ विभाग के लिपिक के पास सवा करोड़ आय से अधिक संपत्ति, निगरानी विभाग की जांच में हुआ खुलासा।

0
790
Black Money
Black Money
  • निगरानी जांच में हुआ उजागर, बस खरीदकर चलाने की चर्चा।

बिहार में जब जिसे मौका मिला उसने बिहार की जनता के पैसों की लूट मचा दी। बिहार में अब तक इतने घोटाले हुए हैं की बिहार की जनता इन घोटालों की वजह से उभर नही पा रही या आसान शब्दों में कहे तो विकसित नहीं हो पा रही। जब से कोविड आई हैं बिहार ही नहीं बल्कि पूरे देश भर के स्वास्थ विभाग को लूट का सबसे बड़ा मौका मिला, और लगभग सबंधित लोगों ने लूट मचाई भी। कोविड जांच से ले कर ऑक्सिजन सिलिंडर तक, रेडीमिसीवर इनजेक्सन से ले कर अस्पतालों में बेड तक जिसे मौका मिला सब ने जनता को लूटा। पर मुजफ्फरपुर जिले का स्वास्थ विभाग इन दिनों सुर्खियों में हैं। कोविड-19 जांच के लिए आई एंटीजेन किट में हुए घोटाला के बाद जिलाधिकारी प्रणव कुमार के आदेश पर हुई बहाली में गड़बड़ी की जांच चल रही हैं।

पर अब इसके साथ सादर अस्पताल में अधीक्षक कार्यालय में कार्यरत कर्मी चंद्रभूषण ओझा के खिलाफ निगरानी की जांच रिपोर्ट के आधार पर बड़े स्तर पर जांच का आग्रह किया गया हैं। निगरानी नें अपनी जांच रिपोर्ट में चंद्रभूषण ओझा के आय से करीब सवा करोड़ की अधिक संपत्ति अर्जित करने की बात कहीं हैं। मुख्य रूप से यह पैसा बस में निवेश करने की बात सामने आई हैं।

MehmaNawazi
MehmaNawazi

संपत्ति में बस का कोई जिक्र नहीं

निगरानी के रिपोर्ट के अनुसार चंद्रभूषण ओझा की संपत्ति की जांच में वेतन व अन्य मद से उनकी आय 57 लाख 75 हज़ार रुपए आँकी गयी। जबकि जांच में आय व्यय व संपत्ति का आंकलन किया गया तो यह राशि 1 करोड़ 82 लाख 78 हज़ार पाई गई। इसे देखते हुए करीब सवा करोड़ रुपए की संपत्ति आय से अधिक पायी गयी। रिपोर्ट के अनुसार सरकार को वर्ष 2013-14 के दी गयी संपत्ति विवरण में कर्मी ने स्वयं, पत्नी, पुत्र के नाम से शून्य वाहन दर्ज किया हैं। जबकि उनके द्वारा वर्ष 2013 में पत्नी के  नाम से दो मिनी बस, एक बस और पुत्रवधू के नाम से एक बस खरीदी गयी। इस पर ही 56 लाख रुपए व्यय किए गए। जांच में यह पाया गया की ये बसे महादेव रथ के नाम से चलाई जाती हैं। रिपोर्ट के अनुसार उक्त कर्मी ने अपने की कार्यालय में कार्यरत एक कर्मी व रिश्तेदार संजय कुमार की पत्नी पूनम देवी के नाम से भी दो बसें खरीदी। जांच में महिला ने इस तरह की किसी बस की खरीद से इंकार कर दिया।  इसके अलावा एक ही नांस ए चलने वाली बस उनके ग्रामीण के बताएं गए। ग्रामीण ने भी बस को अपन बताया। जबकि बस क्रय में जो मोबाइल नंबर दिया गया हैं वह कर्मी चंद्रभूषण ओझा एक पुत्र का था।

Hiring Medicine Adv
Hiring Medicine Adv

निगरानी के रिपोर्ट को गलत बताते हुए चन्द्र भूषण ओझा ने कहा की उनके नाम से कुछ नहीं मिला। पत्नी के नाम से जो बसे हैं वह उन्होने अपनी आय से खरीदी हैं। इसके अलावा कई लोग अपनी बसें महादेव रथ के नांस ए चला रहे हैं। चंद्रभूषण ने बताया की इसकी शिकायत वे पहले भी डीटीओ से कर चुके थे। पटना हाईकोर्ट ने भी उनकी दलील को मानते हुए निलंबन रद्द कर दिया हैं। करीब पाँच वर्ष के निलंबन के बाद इस वर्ष अप्रैल से सेवा फिर से दे रहें हैं। निगरानी को भी उन्होने ब्योरा देते हुए सभी संपत्ति के वैध होने का दावा किया हैं।

Adv - Munna Bhai
Adv-