#NavrunaCase : नवरुणा को नहीं मिला न्याय सीबीआई ने बंद की जांच।

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मुजफ्फरपुर के चर्चित नवरूणा कांड में सोमवार को सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट विशेष कोर्ट में सौंप दी है। मामले में सीबीआई को नवरूणा के अपहरण और हत्या से संबंधित सबूत नहीं मिले है। रिपोर्ट के साथ ही इस हत्याकांड की जांच की जांच भी बंद हो गई है।

मुजफ्फरपुर. मुजफ्फरपुर के बहुचर्चित नवरूणा कांड मामले में सीबीआई ने विशेष कोर्ट में अपनी फाइल रिपोर्ट जमा कर दी है। सीबीआई ने इस मामले में केस से संबंधित तथ्यों और सबूतों का अभाव बताते हुए मुजफ्फरपुर के विशेष कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट दी है। गौरतलब है कि सीबीआई सीरीज को रिपोर्ट पर नवरूणा हत्याकांड का रहस्य और अधिक गहरा गया है।

आपको बता दें कि इस मामले में दर्जनों वैज्ञानिक जांच के बावजूद सीबीआई नवरूणा के अपहरण, हत्या के कारणों और हत्यारों के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं जुटा सकी। जांच अधिकारी सह डीएसपी अजय कुमार ने इस हत्याकांड की जांच में 86 जांच बिंदुओं के आधार पर 40 पेज की रिपोर्ट पेश की है। सीबीआई की रिपोर्ट के साथ ही इस केस की जांच भी बंद हो गई है।

नवरूणा का शव उसके घर के पास से नाले से बरामद हुआ था। लेकिन उसके हत्याकांड का खुलासा करने में सीबीआई नाकाम रही। सीबीआई ने इस मामले में 66 लोगों की गवाही की थी। इसके अलावा इस हत्याकांड को लेकर कोई भी सूचना देने पर 10 लाख की इनाम की घोषणा भी की गई थी। तमाम कोशिशों के बाद भी सीबीआई के हाथ इस केस से संबंधित कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लगे।

जानकारी के अनुसार नगर थाने के तत्कालीन थानेदार जितेंद्र प्रसाद, वार्ड पार्षद राकेश कुमार सिन्हा पप्पू, मोती नगर के रहने वाले विमल अग्रवाल सहित आधा दर्जन संदिग्धों की ब्रेन मैपिंग, लाई डिटेक्टर, नार्को और बयानों के आधार पर भी सीबीआई इस हत्याकांड के अपराधियों को पकड़ने में नाकाम रही। इसके अलावा इस केस में डीएनए और वह टेस्ट तक करवाए गए थे।लेकिन मामले में सीबीआई को गिरफ्तार किए गए आधा दर्जन संदिग्धों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत हाथ नहीं लग सका। अब आने वाली 4 दिसंबर को विशेष कोर्ट में इन आरोपियों के खिलाफ सुनवाई की जाएगी। कयास लगाए जा रहे हैं कि इसी दिन सीबीआई की रिपोर्ट पर भी सुनवाई हो सकती है।

ज्ञात हो कि 17 सितंबर 2012 को जवाहर लाल रोड के अतुल चक्रवर्ती की छोटी बेटी नवरूणा(12) रहस्यमय तरीके से कमरे से गायब हो गई थी। जिसको लेकर उसके पिता ने 18 सितंबर को नगर थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराया था। 26 नवंबर को उसकी लाश घर के सामने नाले में मिली थी। 2 साल बाद यह मामला सीबीआई को सौंपा गया। इस मामले में सीबीआई ने 15 संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। मामले में सीबीआई ने 250 से अधिक को नोटिस देकर कैंप कार्यालय और क्षेत्रीय कार्यालय में बुलाकर मामले की जांच की है. साथ ही सुराग नहीं मिलने पर 10 लाख रुपए के नाम की घोषणा भी की थी।
यह तस्वीर है इसमें नवरुणा के पिता अपनी बेटी नवरुणा के ही गुड़िया के साथ दिख रहे हैं। नवरुणा के पिता कहते हैं कि उनकी बेटी अक्सर ही इस गुड़िया के साथ खेला करती थी और हम ना जाने उनकी बेटी अब कहाँ खो गयी हैं।

नवरुणा के माता-पिता ने अब तक विश्वास नहीं खोया था वह लगातार संघर्ष करते हुए अपनी बेटी को न्याय दिलाने हेतु लगातार आवाज बुलंद करते रहे उन्हें समाज के कई अलग-अलग संगठनों एवं कई समाजसेवियों का भी साथ मिलता रहा।

Save “Navruna” मुहिम : मुजफ्फरपुर के ही कई युवाओं ने नवरुणा को बचाने हेतु कई जगहों पर धरना प्रदर्शन  एवं  विरोध प्रदर्शन  किया। युवाओं ने बैनर के साथ साथ आवाज को बुलंद करते हुए सरकार से जवाब की भी मांग की।

सीबीआई की ओर से शहर के विभिन्न जगहों पर एक अपील पत्र सटवाया गया जिसमें नवरुणा अपहरण कांड से जुड़ी गुत्थी को सुलझाने हेतु मदद करने पर 10,00,000 का इनाम देने की घोषणा की गई।

वौइस् ऑफ़ मुजफ्फरपुर जैसी कई संगठनों ने समय-समय पर धरना प्रदर्शन करते हुए कहा कि बिहार पुलिस अब आश्वासन नहीं परिणाम चाहिए। नवरुणा को बचाने हेतु निरंतर या प्रयास जारी रखा गया।

16 जनवरी 2014 को नवरुणा केस कुछ सीबीआई को सौंपा गया। यानी कि सीबीआई ने लगभग 7 साल तक इस केस की छानबीन की परंतु कई बार कई लोगों को गिरफ्तार कर पूछताछ करने के बावजूद भी किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच पायी।

तत्कालीन एसएसपी के द्वारा नवरुणा की तलाशी हेतु यह पोस्टर जारी किया गया जिस पर साफ तौर पर लिखा था कि बिहार में लापता बेटी की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं परिजन 40 दिनों से लापता है मुजफ्फरपुर की नवरुणा, यदि कोई उसे पाता है तो मुजफ्फरपुर पुलिस को सूचित करें।

नवरुणा के पिता अतुल चक्रवर्ती लगातार ही सीबीआई के रवैए पर सवाल उठा रहे थे उन्होंने पूर्व में ही कहा ताकि सीबीआई से उनका भरोसा उठ चुका है और अब बस भगवान और सुप्रीम कोर्ट पर ही भरोसा बचा है।

सीबीआई के रवैया पर वाकई कई सवाल उठते हैं नवरुणा कांड में कई बार सीबीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंची और और ज्यादा समय की गुहार लगाते रहे, अंततः अब सीबीआई भी हार मान चुकी है।

नवरुणा केस का राजनीतिकरण : राजद एवं विपक्ष की पार्टियों ने लगातार नवरुणा केस में सरकार को लपेटने एवं सरकार के साथ-साथ कई प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए नवरुणा मामले का राजनीतिकरण करते दिखे। परंतु इन तमाम चीजों का भी कोई असर नहीं हो पाया।

मुजफ्फरपुर के वर्तमान विधायक विजेंद्र चौधरी का भी नाम नवरुणा हत्याकांड मामले से जोड़ा गया चुनाव के ठीक पूर्व विजेंदर चौधरी के नाम को नवरुणा मामले से जोड़ते हुए नवरुणा के पिता अतुल चौधरी के द्वारा एक प्रेस वार्ता आयोजित कर तत्कालीन एवं वर्तमान विधायक पर कई गंभीर आरोप लगाए गए।

नवरुणा के विवश मां-बाप को अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले एवं आगामी पहल का रहेगा इंतजार।

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